सर्वोदय आश्रम (गाँधीघर), कुर्सेला : एक परिचय
बिहार के कटिहार जिले के कुर्सेला
स्थित यह सर्वोदय आश्रम एक ऐतिहासिक गाँधीस्थल है। 15 जनवरी 1934 को बिहार में आए
प्रलंयकारी भूकम्प के पीड़ितों के सहायतार्थ महात्मा गाँधी हरिजन सेवक संघ द्वारा
व्यवस्थित अपनी अस्पृश्यता निवारण यात्रा स्थगित कर 11 मार्च 1934 को बिहार पहुँचे
थे। इस यात्रा के अन्तिम दिन 10 अप्रैल 1934 को असम जाने के क्रम में वे पूर्णियाँ
जिले के टिकापट्टी ग्राम से कुर्सेला पधारे थे, कुर्सेला भी उस समय पूर्णियाँ जिले के अन्तर्गत था। उन्होंने
विद्यार्थियों के अनुरोध पर स्थानीय लोगों को सम्बोधित किया था। उसी स्थल के निकट
वर्ष 1948 में सौराष्ट्र के गाँधीवादी कार्यकर्त्ता श्रद्धेय भगवन्न स्वामी द्वारा
इस आश्रम की स्थापना की गई, इसी वर्ष 12 फरवरी को बापू के
बलिदान के पश्चात् बिहार के अग्रणी सर्वोदय नेता श्रद्धेय बैद्यनाथ चौधरी के
नेतृत्व में स्थानीय लोगों द्वारा उनका पार्थिव अंश गंगा-कोसी के पवित्र संगम में
प्रवाहित किया गया था। प्रकृति के सान्निध्य में अवस्थित में इस आश्रम में भूदान
यज्ञ के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे, सम्पूर्ण क्रांति के
उद्घोषक लोकनायक जयप्रकाश नारायण, भारत गणतंत्र के प्रथम
राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. जाकिर हुसैन,
दीदी डॉ. निर्मला देशपाण्डे, गाँधीवादी विचारक
प्रो. डॉ. रामजी सिंह सहित अगणित विभूतियों का पदार्पण हो चुका है। इस आश्रम को
केन्द्रीय गाँधी स्मारक निधि द्वारा अनुदानित कर गाँधीघर में परिणत किया गया ।
वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति,
नई दिल्ली (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की
एक स्वायत्त संस्था) ने इस आश्रम को गाँधी व्याख्या केन्द्र के रूप में स्वीकृत
किया है तथा पर्यटन विभाग, बिहार सरकार ने इस आश्रम को
गाँधी-सर्किट में सम्मिलित किया है। वर्तमान में गाँधीवादी कार्यकर्त्ता श्री नरेश
यादव, भूतपूर्व संसद सदस्य (राज्यसभा) की अध्यक्षता में गठित
एक बहुसदस्यीय समिति आश्रम का प्रबन्धन करती है।